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अंडी दर आजचा कोल्हापूर

अंडी दर आजचा कोल्हापूर, समीर - ठीक है दोस्तों आज चूत पार्टी मेरी तरफ से लेकिन रात को दारू तुम लोग पिलवाओगे और मुर्गा भी बोलो जल्दी से मंजूर है की नहीं वरना जाओ जो करना है कर लो मैं नहीं करने दूंगा कुछ तुम लोगो को मैं आपकी गांड भी तो बहुत बड़ी और सेक्सी है, मैं तो आपकी मोटी गांड को देखते ही पागल हो गया था और तभी से आपकी गांड में लण्ड डालने के बारे में सोच रहा था

रश्मि धीरे से अपने बेटे की आँखो में देखते हुए अपने हाथ अपने मम्मों और जाँघो पर से हटा लेती है और गीले और बदन से चिपके वस्त्रो में क़ैद अपनी लगभग नंगी काया अपने बेटे की आँखो के सामने कर देती है. मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। जय अंकल ने उठकर माँ के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। माँ अपना पाँव हटाने लगीं।

सरिता- क्या करूँ.. मेरे ‘वो’ कुछ खास चुदाई नहीं कर पाते हैं। जब से तुमसे चुदी हूँ.. पति के लण्ड में मजा ही नहीं आता.. अब यहाँ आई हूँ.. तो तुमसे चुदवा लेती हूँ। अंडी दर आजचा कोल्हापूर यह तो अकसर जालिम औरत में ही पाई जाती है वो भी एक लड़कि थी जो मूझ को एक मिनट में क झ को खाक में मिला दिया था।

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  1. चुदते चुदते ऊ ओह आह करते करते वो बोलने लगा, मेरी माँ का नाम सजल पटेल है , वो 45 साल की है, उसकी लम्बाई 5 फूट 3 इंच है, शादी के वक्त तो दुबली थी अब मोटी है।
  2. ‘कैंची’, ‘रेजर’, ‘क्रीम’, ‘ऐसे करो’, ‘ऐसे पकड़ो’, ‘ये है’, ‘ये रहा’, ‘वहाँ बीच में’, ‘कितने गीले’, ‘सम्हाल के’, ‘लोशन’, ‘सपना-सा है’…………… वगैरह वगैरह स्त्री-पुरुष की ইন্ডিয়ান থ্রি এক্স ভিডিও
  3. जिस प्रकार अपने हाथ से मेरे लण्ड को उपर नीचे कर रही थी ठीक उसी प्रकार मेरे लण्ड को अपने मुंह से कर रही थी। फिर जब वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने कुछ इस तरह उसको लिटाया कि मेरा बाबूलाल उसकी मुनिया में ही रहा और उसी वक्त मुझे हल्के से खून की लालिमा दिखी पर मैं चुप रहा।
  4. अंडी दर आजचा कोल्हापूर...भाभी- ज्यादा भोले मत बनो। मैंने और सासू माँ ने इतनी मालिश की तुम्हारी.. और तुम हो कि कभी हमारे साथ कुछ किया ही नहीं.. दिदि मेरी बातो को शांत होकर सुन रही थी और तब बोली तो प्रमोद... तुम्हारे कहने का मतलब है कि मेरी सुंदरता ने तुम्हे पागल बना दिया था।
  5. उसके बाद कालिया ने अपनी माँ की चूत को फिर से सहलाया और उसके चूत के छेद में ऊँगली डाल कर पूछा – माँ , इसी छेद में बापू तुझे चोदता है? फिर तो जब भी मौका मिलता.. मेडम मुझे फोन कर देती ऑर मैं मेडम को चोदने पहुच जाता. कुछ दिनो बाद, सीईओ ने मेरे काम को देखते हुए, मुझे मेडम की जगह सूपरवाइज़र बनने का ऑफर दिया.

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मैंने मौका देख कर, अपने हाथ में उनका हाथ ले लिया और कहा – अब हाथ तो पकड़ ही सकते हो.. !! कहीं मैं, फिर से गिर ना जाऊं..

'हाय जीजू, आप ...?' मैंने जल्दी से चादर को अपने कंधे तक खींचने की कोशिश की। पर जीजू ने मेरी भरी जवानी की एक झलक तो देख ही ली थी। मैंने जानकर ही तो वो छोटी सी शमीज पहनी हुई थी। और वैसे ही रूक कर मेरी चूची हल्के हाथ से दबाने लगे। थोड़ी देर में मेरी बुर में थोड़ी गुदगुदाहट हुई, वो समझ गए और फिर एक जोर का झटका दे मारा, अब की बार मैं रो पड़ी और चीखने लगी, शायद मेरी बुर से खून निकलने लगा था।

अंडी दर आजचा कोल्हापूर,तभी मम्मी ने मेरे लंड को टटोला और उसे दबाने लगीं.. मैंने भी बिना देर किए.. मम्मी के उरोजों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में मम्मी ज़ोर-ज़ोर से सिसयाने लगीं- चोद दे मुझे.. अपनी माँ की चूत चोद दे.. मादरचोद बन जा.. फाड़ डाल मेरी चूत.. इसका भोसड़ा बना दे..

हाय दोस्तों, मेरा नाम नीरज सिंह है और यह मेरी पहली कहानी है। अगर इसमें कोई गलती हो तो आप लोग मुझे जरूर बताइए।

उसकी. बुर की गहराई में मेरा गर्म गर्म वीर्य ढेर मात्रा में गिरा था वह अपनी बुर में लन्ड के गर्म वार्प को महसूस कर सिहरन से भर उठी और इस स्थिति में वह अपनी पसीज रही बूर को मेर लन्ड पर मजबूती से दबोच ली।हाउसफुल ३ मूवी डाउनलोड

हजरात, उस हैरान और हलकान कर देने वाले केस का जो असली इनाम आपके खादिम को मिला वो डेढ़ लाख रुपए की फीस नहीं थी जो मैंने अपने दो संपन्न क्लायंटों से कमाई थी, वो मेरे गरीबखाने पर शुक्रगुजार होने को आई एक हसीना की आमद थी जो यूं शुक्रगुजार होना चाहती थी जैसे कोई औरत ही किसी मर्द की हो सकती थी । मैं अभी बैठा ही था कि वहां एक सूट-बूटधारी साउथ इंडियन ने कदम रखा । उम्र में वो कोई पचास साल का था और इतना काला था कि चमड़ी की और बालों की रंगत में फर्क मुश्किल से ही मालूम होता था । उसकी आंखें तीखी थीं और चेहरे पर बुद्धिमत्ता की छाप थी ।

मन ही मन मैं बड़ा खुश हो रहा था. सासु माँ के संग ऐसा करने के ख़याल से ही मेरा लंड पन्ट में एकदम टाइट हो रखा था.

पति देव को अच्छी तरह मालूम था कि मैं कभी-कभी हस्तमैथुन मैथुन कर लेती हूँ.. कई बार मेरी सिसकियाँ सुनकर उठ जाते और गौर से मुझे देखते रहते। उनकी आँखों के सामने ही मैं अपनी योनि को ज़ोरों से घिसती और रगड़ती रहती और मादक स्वरों में मिल रही सुख का आनन्द लेती रहती।,अंडी दर आजचा कोल्हापूर ‘देखो डॉली.. मैं तुम्हारा अंकल हूँ.. तुम्हारी माँ का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है.. तुम बड़ी हो गई हो.. समझदार हो.. इस बात को समझ सकती हो।’

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