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बहीण भाऊ झवाझवी

बहीण भाऊ झवाझवी, सेठ की गद्दी (बैठक) हवेली के बाहरी हिस्से में थी, एक बड़े से हॉल नुमा कमरे के बीचो-बीच, एक बड़े से तखत के उपर मोटे-मोटे गद्दे, जिसपर हर समय एक दूध जैसी सफेद चादर बिछि होती थी, कौशल्या देवी का दिल भी उसकी बातों को सुन बैठ गया था. सोचती थी कितनी अभागिन है ये स्त्री जो किसी सामान की तरफ कीमतों से तुलकर आई है. कितना दुःख इस लडकी को मिला है. बोली, अच्छा सुन्दरी तुम्हारी बहन कौन से गाँव में रहती हैं? क्या उनसे तुम्हारा मिलना हो पाया?

शंकर उसकी एक चुचि को चूसने में व्यस्त था, जब उसने सुषमा के ये शब्द सुने, तो उसे मुँह से निकालकर उसकी घुंडी को उंगली से सहलाते हुए बोला – उस लड़की ने शंकर को दिखाकर अपनी चूत को खुज़ाया और अपनी नशीली आवाज़ में फुसफुसा कर बोली – क्यों गला घोंट रहा है बेचारे का, तू कहे तो मे कुछ मदद करूँ…!

हमें माफ़ करदो, बिना अपने बेटे की कमज़ोरी जाने हम तुम्हें ब्याहकर इस घर में ले आए, इस आस में कि शायद तुम वो खुशी दे सको जो बड़ी बहू नही दे पाई… बहीण भाऊ झवाझवी अब वो नही चाहती थी, कि मालिक अब रुकें, आज वो अपने जिस्म की प्यास को पूरी तरह से शांत कर लेना चाहती थी…!

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  1. प्रिया तड़प कर उसे लिपटाते हुए बोली – आअहह…शंकर…अब वही हिटलरनी तुम्हारी दासी है, इसे अपने प्यार से नहला दो मेरे भाई...!
  2. रंगीली ने उसे अपनी बाहों में कस लिया, उसके कड़क निपल अपने बेटे की पत्थर जैसी कठोर छाती से पिस्ने लगे… इंग्लिश पिक्चर फिल्म सेक्सी
  3. मैंनेअपनी बात पूरी कर ली। कोई मिलावट कोई झूठ नहीं है मेरे बात में । बस चिंता तो तुम्हारी है कि क्या तुम इस को एक्सेप्ट कर के एक नयी सुरुआत कर सकते हो की हम अच्छे दोस्त रहेंगे। वो जान बूझ कर ज़्यादा देर तक उनके पैर दबाती रही…, फिर लाला ने उसके सिर पर आशीर्वाद स्वरूप हाथ फेरा, और उसकी पीठ सहलाते हुए उसके कंधे पकड़ कर बोले…
  4. बहीण भाऊ झवाझवी...इसी ख्याल के साथ सबसे पहले बात हुई माँ से सबी हाल समाचार जानकर मैंने फ़ोन कट किया । पापा को कॉल किआ तो पापा कहि बिजी थे मेसेज आया बाद में बात करता हूँ । मैं हैरानी से परिधि की ओर देखते हुए ( मन मे) कितनी शरारती लड़की है फिर रहा नहीं गया तो पूछ ही बैठा कि.... क्यों आप मेरे झूठ को सच करने में लगी हैं ।
  5. सुषमा उसके हाथों को अपने उभारों पर रख कर बोली – पश्चाताप की आग में तो मे आजतक जलती आरहि हूँ उस आग को बुझा दो शंकर, तुम्हारी माँ भी यही चाहती हैं…! कुछ देर बहू को पटाने का प्लान तय करके वो अपने काम काज में जुट गयी, और लाला अपनी नयी कमसिन बहू को चोदने के ख्वाबों में खो गये……………!

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अब तो मेरा चेहरा भी उतर गया। दिया वो तो अभी ही कुछ बोलने को हुए तो मैंने उस से चुप रहने का इशारा किया और उसे शांत करवाया। एक और ऑडियंस थी वंहा जिसका रिएक्शन देख मैं समझ गया की इसे भी बुरा लगा है। खैर बांकी मौसा जी के समर्थन में, और सब ने बोला की मुझे ऐसी बातें नहीं करनी चहिये।

ऐसा खेल भोला ने अपने जीवन में कभी नही खेला था, वासना की आँधी अपनी पूर्ण गति से दोनो को उड़ाए ले जा रही थी…, देखो शुरुआत में ही अपने अरमानों को काबू में कर लो तो यह ज्यादा अच्छा रहेगा हम दोनो के लिए क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरा तुमसे मिलना बात करना तुम्हें किसी गलत फहमी की ओर ले जाये

बहीण भाऊ झवाझवी,आलम यह था कि अब हमारे बीच से हवा भी नहीं गुजर रही थी उसका हर अंग मुझे महसूस हो रहा था । ओह हो ये क्या हो रहा है मैं तो बिल्कुल काजल में डूब जाने को बेकरार बैठा था । एक तो कच्ची उम्र और ऐसा होना काम सागर की चाहतों को गोता खाना ही था ।

दूसरी चादर ओढ़ खुद ओढ़ लेट गये. राणाजी बहुत थक गये थे. उन्हें माला की थकावट का भी अंदाज़ा था लेकिन ये उनकी सुहागरात थी. कम से कम दुल्हन से दो बातें तो कर ही सकते थे. उन्होंने अपनी दुल्हन को नाम ले आवाज दी, माला. तुम्हें नींद आ रही है क्या?

लाला कुछ देर यौंही उसे अंदर डाले पड़े रहे, उनके लंड पर उसकी चूत की परतों की फूल-पिचकने के एहसास ने लाला का मज़ा दुगना कर दिया…!देवर भाभी की नंगी सेक्सी

माला ने एक झटके में पलंग के सिरहाने गद्दे के नीचे हाथ डाला और सौ सौ के दो नोट बाहर निकाल लिए. साथ में एक एक रूपये का सिक्का भी था. अब वो दोनो 69 की पोज़िशन बनाकर एक दूसरे के अंगों का सेवन कर रहे थे.., लाजो ने लंड चूस्ते हुए अपना ब्लाउस भी निकाल बाहर किया..,

अंततः उसने मालिक और नौकर के लिहाज को ताक पर रख कर विरोध करना शुरू कर दिया, और जैसे तैसे अपने को उनकी गिरफ़्त से आज़ाद किया, और मौका लगते ही फ़ौरन वहाँ से भाग गयी…

लेकिन अब मैं इस बारे में इससे आगे कोई बात नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने परिधि से बात बदलने को कहा । रूही की चर्चा होने से मैं थोड़ा उदास हो गया कि तभी परिधि ने ऐसा कुछ कहा कि मेरे दिल मे छप गया ।,बहीण भाऊ झवाझवी सोनल नीचे गई कुछ देर बाद में भी फ्रेश होकर नीचे चला गया । हमलोग नास्ता करके इंस्टीट्यूट चल दिए । वहाँ का सारा काम करने के बाद हम वापस लौटे कुछ खास काम नहीं था बस एक ही काम को छोड़कर .... पड़े अपने बिस्तर में रूही के बारे में सोचना ।

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